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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.134.32 
लोमश उवाच
ततस्ते पूजिता विप्रा वरुणेन महात्मना।
उदतिष्ठंस्तत: सर्वे जनकस्य समीपत:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
लोमश कहते हैं: युधिष्ठिर! तत्पश्चात महाबुद्धिमान वरुण द्वारा पूजित वे समस्त ब्राह्मण (जिन्हें बंदी ने जल में डुबो दिया था) सहसा राजा जनक के समक्ष प्रकट हो गये।
 
Lomasha says: Yudhishthira! Thereafter all those Brahmins (who were drowned in water by Bandi) worshipped by the great-minded Varuna, suddenly appeared before King Janaka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)