श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.134.31 
बन्द्युवाच
अहं पुत्रो वरुणस्योत राज्ञो
न मे भयं विद्यते मज्जितस्य।
इमं मुहूर्तं पितरं द्रक्ष्यतेऽय-
मष्टावक्रश्चिरनष्टं कहोडम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
बंदी ने कहा, "हे राजन! मैं सचमुच राजा वरुण का पुत्र हूँ, इसलिए मुझे जल में डूबने का कोई भय नहीं है। यह अष्टावक्र अपने पिता कहोड़ को, जो बहुत समय से मरे हुए हैं, इसी क्षण देखेगा।"
 
Bandi said, "O King! I am indeed the son of King Varuna, so I have no fear of being drowned in the water. This Ashtavakra will see his father Kahod, who has been dead for a long time, at this very moment." 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)