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mahabharat 3.134.19: अष्टावक्र बोले: संवत्सर में बारह महीने होते हैं, जगती छन्द के प्रत्येक पाद में बारह अक्षर होते हैं, प्राकृत यज्ञ बारह दिन का माना जाता है, बुद्धिमान पुरुष यहाँ बारह आदित्यों का वर्णन करते हैं॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.134.19 
अष्टावक्र उवाच
संवत्सरं द्वादशमासमाहु-
र्जगत्या: पादो द्वादशैवाक्षराणि।
द्वादशाह: प्राकृतो यज्ञ उक्तो
द्वादशादित्यान् कथयन्तीह धीरा:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अष्टावक्र बोले: संवत्सर में बारह महीने होते हैं, जगती छन्द के प्रत्येक पाद में बारह अक्षर होते हैं, प्राकृत यज्ञ बारह दिन का माना जाता है, बुद्धिमान पुरुष यहाँ बारह आदित्यों का वर्णन करते हैं॥19॥
 
Aṣṭāvakra said: There are twelve months in a Samvatsara, each foot of the Jagati Chanda has twelve syllables, the Prakrit Yajna is considered to be of twelve days, the wise men describe the twelve Adityas here.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)