श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 134: बन्दी और अष्टावक्रका शास्त्रार्थ, बन्दीकी पराजय तथा समङ्गामें स्नानसे अष्टावक्रके अंगोंका सीधा होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.134.13 
अष्टावक्र उवाच
षडाधाने दक्षिणामाहुरेके
षट् चैवेमे ऋतव: कालचक्रम्।
षडिन्द्रियाण्युत षट् कृत्तिकाश्च
षट् साद्यस्का: सर्ववेदेषु दृष्टा:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अष्टावक्र बोले - कुछ विद्वानों का मत है कि अग्नि स्थापना के समय दक्षिणा में केवल छह गौएँ ही देनी चाहिए । ये छह ऋतुएँ ही संवत्सर रूपी कालचक्र की सिद्धि करती हैं । मन सहित छह ही इन्द्रियाँ हैं । कृत्तिकाओं की संख्या भी छह ही है और समस्त वेदों में साद्यस्क नामक छह ही यज्ञ देखे गए हैं ॥13॥
 
Ashtavakra said - Some scholars are of the opinion that at the time of setting up the fire, only six cows should be given as dakshina. These six seasons only bring about the success of the time cycle in the form of the Samvatsara. There are only six sense organs including the mind. The number of Krittikas is only six and in all the Vedas only six yagnas named Saadyask have been seen.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)