तं वै विप्र: पर्यचरत् सशिष्य-
स्तां च ज्ञात्वा परिचर्यां गुरु: स:।
तस्मै प्रादात् सद्य एव श्रुतं च
भार्यां च वै दुहितरं स्वां सुजाताम्॥ ९॥
अनुवाद
ब्राह्मण 'कहोड़' एक विनम्र शिष्य की भाँति उद्दालक ऋषि की सेवा किया करते थे। अपने शिष्य की सेवा का महत्त्व समझकर गुरु ने शीघ्र ही उन्हें समस्त वेद-शास्त्रों की शिक्षा दी तथा अपनी पुत्री सुजाता को भी पत्नी के रूप में प्रदान किया।॥9॥
Brahmin 'Kahoda' used to serve the sage Uddalak like a humble disciple. Realising the importance of his disciple's service, the Guru soon taught him all the Vedas and scriptures and also gave him his daughter Sujata as his wife.॥9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥