श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 132: अष्टावक्रके जन्मका वृत्तान्त और उनका राजा जनकके दरबारमें जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.132.7 
युधिष्ठिर उवाच
कथंप्रभाव: स बभूव विप्र-
स्तथाभूतं यो निजग्राह बन्दिम्।
अष्टावक्र: केन चासौ बभूव
तत् सर्वं मे लोमश शंस तत्त्वम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- लोमशजी! उस ब्रह्मर्षि का क्या प्रभाव था, जिसने बंदी जैसे प्रकाण्ड विद्वान को भी जीत लिया था? वह अष्टावक्र (आठों अंगों से विकृत) क्यों हो गया? ये सब बातें विस्तारपूर्वक मुझसे कहिए।
 
Yudhishthira asked- Lomashji! What was the influence of that Brahmarshika who conquered even a renowned scholar like Bandi. Why did he become Ashtavakra (deformed in all the eight limbs). Tell me all these things in detail.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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