Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.131.27-28: परन्तु दूसरे पलड़े में रखा कबूतर मांस से भारी था। तब महाराज उशीनर ने पुनः अपना मांस काटकर चढ़ाया। बार-बार ऐसा करने पर भी जब मांस कबूतर के मांस के बराबर नहीं हुआ, तो सारा मांस काटकर स्वयं तराजू पर चढ़ गए। 27-28 | mahabharat अध्याय 3.131: राजा उशीनरद्वारा बाजको अपने शरीरका मांस देकर शरणमें आये हुए कबूतरके प्राणोंकी रक्षा करना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ध्रियमाण: कपोतस्तु मांसेनात्यतिरिच्यते।
पुनश्चोत्कृत्य मांसानि राजा प्रादादुशीनर:॥ २७॥
न विद्यते यदा मांसं कपोतेन समं धृतम्।
तत उत्कृत्तमांसोऽसावारुरोह स्वयं तुलाम्॥ २८॥
अनुवाद
परन्तु दूसरे पलड़े में रखा कबूतर मांस से भारी था। तब महाराज उशीनर ने पुनः अपना मांस काटकर चढ़ाया। बार-बार ऐसा करने पर भी जब मांस कबूतर के मांस के बराबर नहीं हुआ, तो सारा मांस काटकर स्वयं तराजू पर चढ़ गए। 27-28
But the pigeon kept in the other pan was heavier than the meat. Then Maharaja Ushinar again cut his own flesh and offered it. Even after doing this repeatedly, when the meat did not equal the pigeon's, then after cutting all the meat, he himself climbed on the scale. 27-28.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥