श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 131: राजा उशीनरद्वारा बाजको अपने शरीरका मांस देकर शरणमें आये हुए कबूतरके प्राणोंकी रक्षा करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.131.14 
राजोवाच
बहुकल्याणसंयुक्तं भाषसे विहगोत्तम।
सुपर्ण: पक्षिराट् किं त्वं धर्मज्ञश्चास्यसंशयम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा- पक्षीश्रेष्ठ! तुम्हारी बातें अत्यंत कल्याणकारी गुणों से परिपूर्ण हैं। क्या तुम साक्षात् पक्षीराज गरुड़ नहीं हो? इसमें कोई संदेह नहीं कि तुम धर्म के ज्ञाता हो। 14॥
 
The king said – Best bird! Your words are full of very beneficial qualities. Aren't you the bird king Garuda in person? There is no doubt that you are knowledgeable about religion. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)