एतद् विष्णुपदं नाम दृश्यते तीर्थमुत्तमम्।
एषा रम्या विपाशा च नदी परमपावनी॥ ८॥
अत्र वै पुत्रशोकेन वसिष्ठो भगवानृषि:।
बद्ध्वाऽऽत्मानं निपतितो विपाश: पुनरुत्थित:॥ ९॥
अनुवाद
यह विष्णुपद नामक महान तीर्थस्थान प्रतीत होता है और यह परम पवित्र एवं सुन्दर विपाशा (व्यास) नदी है। यहीं पर भगवान वशिष्ठ मुनि ने पुत्र शोक से पीड़ित होकर अपने शरीर को पाश से बाँधकर उसमें छलांग लगा दी थी, किन्तु पाश से मुक्त होकर वे पुनः जल से बाहर आ गए थे। 8-9॥
It appears to be a great place of pilgrimage named Vishnupad and it is the most sacred and beautiful Vipasha (Vyas) river. It was here that Lord Vashishtha Muni, suffering from grief over his son, tied his body with noose and jumped into it, but after being freed from the noose, he again came out of the water. 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥