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mahabharat 3.130.7: हे राजन! सूर्य के समान तेजस्वी यह प्रभास तीर्थ* चमक रहा है, जो इन्द्र को अत्यंत प्रिय है। यह पवित्र स्थान समस्त पापों का नाश करने वाला और अत्यंत पवित्र है॥7॥   |   mahabharat अध्याय 3.130: विभिन्न तीर्थोंकी महिमा और राजा उशीनरकी कथाका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 130: विभिन्न तीर्थोंकी महिमा और राजा उशीनरकी कथाका आरम्भ  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.130.7 
एतत् प्रकाशते तीर्थं प्रभासं भास्करद्युते।
इन्द्रस्य दयितं पुण्यं पवित्रं पापनाशनम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! सूर्य के समान तेजस्वी यह प्रभास तीर्थ* चमक रहा है, जो इन्द्र को अत्यंत प्रिय है। यह पवित्र स्थान समस्त पापों का नाश करने वाला और अत्यंत पवित्र है॥7॥
 
O King, radiant like the Sun! This Prabhas Tirtha* is shining, which is very dear to Indra. This holy place is the destroyer of all sins and is extremely sacred. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)