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mahabharat 3.130.21: यमुना नदी के दोनों किनारों पर जल और उपजला नामक दो नदियाँ हैं, जहाँ राजा उशीनर ने यज्ञ किया था और इंद्र से भी ऊँचा दर्जा प्राप्त किया था।   |   mahabharat अध्याय 3.130: विभिन्न तीर्थोंकी महिमा और राजा उशीनरकी कथाका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 130: विभिन्न तीर्थोंकी महिमा और राजा उशीनरकी कथाका आरम्भ  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.130.21 
जलां चोपजलां चैव यमुनामभितो नदीम्।
उशीनरो वै यत्रेष्ट्वा वासवादत्यरिच्यत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यमुना नदी के दोनों किनारों पर जल और उपजला नामक दो नदियाँ हैं, जहाँ राजा उशीनर ने यज्ञ किया था और इंद्र से भी ऊँचा दर्जा प्राप्त किया था।
 
See the two rivers Jala and Upjala on both sides of the river Yamuna, where king Ushinar had performed a yajna and attained a status higher than even Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)