Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.130.2-3: प्राचीन काल में यज्ञ करते समय प्रजापति दक्ष ने इस स्थान को वरदान दिया था कि यहाँ मरने वाले मनुष्य स्वर्ग के अधिकारी होंगे। यह सुन्दर, दिव्य और तीव्रगामी सरस्वती नदी है और यही सरस्वती का विनशन नामक तीर्थस्थान है।॥2-3॥ | mahabharat अध्याय 3.130: विभिन्न तीर्थोंकी महिमा और राजा उशीनरकी कथाका आरम्भ । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमाशी: प्रयुक्ता हि दक्षेण यजता पुरा।
इह ये वै मरिष्यन्ति ते वै स्वर्गजितो नरा:॥ २॥
एषा सरस्वती रम्या दिव्या चौघवती नदी।
एतद् विनशनं नाम सरस्वत्या विशाम्पते॥ ३॥
अनुवाद
प्राचीन काल में यज्ञ करते समय प्रजापति दक्ष ने इस स्थान को वरदान दिया था कि यहाँ मरने वाले मनुष्य स्वर्ग के अधिकारी होंगे। यह सुन्दर, दिव्य और तीव्रगामी सरस्वती नदी है और यही सरस्वती का विनशन नामक तीर्थस्थान है।॥2-3॥
In ancient times, while performing a yajna, Prajapati Daksha blessed this place that the people who die here will attain the right to heaven. This is the beautiful, divine and fast flowing river Saraswati and this is the pilgrimage place of Saraswati named Vinshan.॥2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥