Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.130.19: पाण्डुनन्दन! महाराज! अब आप उस भृगुतुंग नामक महान पर्वत को देखेंगे, जिसके विषय में आपने सुना है कि वह योगसिद्धिका का संक्षिप्त रूप है - जिसके दर्शन मात्र से समाधि का फल प्राप्त होता है ॥19॥ | mahabharat अध्याय 3.130: विभिन्न तीर्थोंकी महिमा और राजा उशीनरकी कथाका आरम्भ । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
समाधीनां समासस्तु पाण्डवेय श्रुतस्त्वया।
तं द्रक्ष्यसि महाराज भृगुतुङ्गं महागिरिम्॥ १९॥
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! महाराज! अब आप उस भृगुतुंग नामक महान पर्वत को देखेंगे, जिसके विषय में आपने सुना है कि वह योगसिद्धिका का संक्षिप्त रूप है - जिसके दर्शन मात्र से समाधि का फल प्राप्त होता है ॥19॥
Pandunandan! Maharaj! Now you will see that great mountain named Bhrigutung, about which you have heard that it is a brief form of Yogasiddhika – by just seeing which one attains the fruit of Samadhi. 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥