श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 130: विभिन्न तीर्थोंकी महिमा और राजा उशीनरकी कथाका आरम्भ  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.130.1 
लोमश उवाच
इह मर्त्यास्तनूस्त्यक्त्वा स्वर्गं गच्छन्ति भारत।
मर्तुकामा नरा राजन्निहायान्ति सहस्रश:॥ १॥
 
 
अनुवाद
लोमशजी कहते हैं - 'भारत! यहाँ शरीर त्यागकर मनुष्य स्वर्ग जाते हैं; इसलिए हजारों लोग इस पवित्र स्थान पर आकर मरणासन्न होते हैं।॥1॥
 
Lomasha says, 'Bharat! After leaving the body here, men go to heaven; therefore thousands come and reside in this holy place to die.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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