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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 13: श्रीकृष्णका जूएके दोष बताते हुए पाण्डवोंपर आयी हुई विपत्तिमें अपनी अनुपस्थितिको कारण मानना
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श्लोक 15
श्लोक
3.13.15
सोऽहमेत्य कुरुश्रेष्ठ द्वारकां पाण्डुनन्दन।
अश्रौषं त्वां व्यसनिनं युयुधानाद् यथातथम्॥ १५॥
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र महाकुरु! जब मैं द्वारका में आया, तब मैंने सात्यकि से यह सच्चा समाचार सुना कि तुम संकट में हो।॥15॥
O great Kuru, son of Pandu! When I came to Dwaraka, I heard the true news from Satyaki that you were in trouble. ॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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