श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 129: कुरुक्षेत्रके द्वारभूत प्लक्षप्रस्रवण नामक यमुनातीर्थ एवं सरस्वतीतीर्थकी महिमा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.129.13 
एतत् प्लक्षावतरणं यमुनातीर्थमुत्तमम्।
एतद् वै नाकपृष्ठस्य द्वारमाहुर्मनीषिण:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यह यमुना जी का प्लक्षवतरण नामक उत्तम तीर्थ है। विद्वान् पुरुष इसे स्वर्ग का द्वार कहते हैं॥13॥
 
This is the best pilgrimage place of Yamuna ji called Plakshavatran. Wise men call it the gate to heaven.॥ 13॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd