श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 127: सोमक और जन्तुका उपाख्यान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.127.2 
लोमश उवाच
युधिष्ठिरासीन्नृपति: सोमको नाम धार्मिक:।
तस्य भार्याशतं राजन् सदृशीनामभूत् तदा॥ २॥
 
 
अनुवाद
लोमशजी बोले- युधिष्ठिर! सोमक नाम का एक धर्मात्मा राजा राज्य करता था। उसकी सौ रानियाँ थीं। वे सब रूप और आयु में लगभग एक समान थीं॥ 2॥
 
Lomashji said- Yudhishthir! A virtuous king named Somaka ruled over the kingdom. He had a hundred queens. All of them were almost the same in looks and age.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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