श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 127: सोमक और जन्तुका उपाख्यान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.127.1 
युधिष्ठिर उवाच
कथं वीर्य: स राजाभूत् सोमको वदतां वर।
कर्माण्यस्य प्रभावं च श्रोतुमिच्छामि तत्त्वत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - वक्ताओं में श्रेष्ठ महर्षि ! राजा सोमक का पराक्रम क्या था ? मैं उसके कार्यों और प्रभावों का यथार्थ वर्णन सुनना चाहता हूँ । 1॥
 
Yudhishthir asked – Maharishi, the best among speakers! What was the might of King Somaka? I want to hear the exact description of his actions and effects. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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