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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 123: अश्विनीकुमारोंकी कृपासे महर्षि च्यवनको सुन्दर रूप और युवावस्थाकी प्राप्ति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.123.4 
तत: सुकन्या सव्रीडा तावुवाच सुरोत्तमौ।
शर्यातितनयां वित्तं भार्यां मां च्यवनस्य च॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब सुकन्या ने लज्जित होकर उन दोनों महान देवताओं से कहा - 'हे देवो! आपको यह जानना चाहिए कि मैं राजा शर्याति की पुत्री और महर्षि च्यवन की पत्नी हूँ।
 
Then Sukanya, feeling ashamed, said to those two great gods - 'O Lords! You should know that I am the daughter of King Sharyati and the wife of Maharishi Chyavan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)