श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.120.4 
कस्मादिमौ रामजनार्दनौ च
प्रद्युम्नसाम्बौ च मया समेतौ।
वसन्त्यरण्ये सहसोदरीयै-
स्त्रैलोक्यनाथानभिगम्य पार्था:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
आप दोनों भाई बलराम और श्रीकृष्ण, प्रद्युम्न और साम्ब तथा मैं सब यहाँ उपस्थित हैं। तीनों लोकों के इन तीन राजाओं से मिलकर भी ये कुन्तीपुत्र अपने भाइयों के साथ वन में क्यों रहते हैं?॥4॥
 
You both brothers Balarama and Sri Krishna, Pradyumna and Samba along with me are all present. Despite meeting these three kings of the three worlds, why do these sons of Kunti still live in the forest with their brothers?॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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