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mahabharat 3.120.24: युधिष्ठिर किसी भी कारण से, चाहे वह इच्छा हो, भय हो या लोभ हो, कभी भी अपने धर्म का परित्याग नहीं कर सकते। इसी प्रकार महारथी भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव और द्रुपद की पुत्री कृष्णा भी अपने धर्म का परित्याग नहीं कर सकते॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 3.120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.120.24 
न ह्येष कामान्न भयान्न लोभाद्
युधिष्ठिरो जातु जह्यात् स्वधर्मम्।
भीमार्जुनौ चातिरथौ यमौ च
तथैव कृष्णा द्रुपदात्मजेयम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर किसी भी कारण से, चाहे वह इच्छा हो, भय हो या लोभ हो, कभी भी अपने धर्म का परित्याग नहीं कर सकते। इसी प्रकार महारथी भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव और द्रुपद की पुत्री कृष्णा भी अपने धर्म का परित्याग नहीं कर सकते॥ 24॥
 
Yudhishthira can never abandon his Dharma due to any reason of desire, fear or greed. Similarly, the great warriors Bhima, Arjun, Nakula, Sahadeva and this daughter of Drupada, Krishna, cannot abandon their Dharma.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)