Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.120.21: जब तक पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर अपनी प्रतिज्ञा पूरी नहीं कर लेते, जो कुरुवंश के इस रत्न ने जुए के समय की थी, तब तक अभिमन्यु को इस पृथ्वी पर शासन करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 3.120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.120.21 
ततोऽभिमन्यु: पृथिवीं प्रशास्तु
यावद् व्रतं धर्मभृतां वरिष्ठ:।
युधिष्ठिर: पारयते महात्मा
द्यूते यथोक्तं कुरुसत्तमेन॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब तक पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ युधिष्ठिर अपनी प्रतिज्ञा पूरी नहीं कर लेते, जो कुरुवंश के इस रत्न ने जुए के समय की थी, तब तक अभिमन्यु को इस पृथ्वी पर शासन करना चाहिए।
 
Until the great Yudhishthira, the best of the virtuous, completes his vow, which this jewel of the Kuru clan had pledged during the gambling, Abhimanyu should rule this earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)