श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.120.15 
यथा प्रविश्यान्तरमन्तकस्य
काले मनुष्यो न विनिष्क्रमेत।
तथा प्रविश्यान्तरमस्य संख्ये
को नाम जीवन् पुनराव्रजेत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जैसे मृत्यु के समय यमराज की भुजाओं में पड़ा हुआ मनुष्य वहाँ से बचकर नहीं निकल सकता, वैसे ही युद्धभूमि में वीर साम्ब के वश में आया हुआ कौन योद्धा पुनः जीवित होकर लौट सकता है? ॥15॥
 
Just as at the time of death a man who is in the arms of Yamaraja cannot escape from there, similarly in the battle-field which warrior who has come under the control of the valiant Samba can return alive again? ॥15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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