श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिके शौर्यपूर्ण उद्‍गार तथा युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका अनुमोदन एवं पाण्डवोंका पयोष्णी नदीके तटपर निवास  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.120.1 
सात्यकिरुवाच
न राम काल: परिदेवनाय
यदुत्तरं त्वत्र तदेव सर्वे।
समाचरामो ह्यनतीतकालं
युधिष्ठिरो यद्यपि नाह किंचित्॥ १॥
 
 
अनुवाद
सात्यकि बोले, "बलराम! यह समय बैठकर विलाप करने का नहीं है। अब जो कुछ करना है, हम सबको मिलकर करना चाहिए। यद्यपि महाराज युधिष्ठिर हमसे कुछ नहीं कहते, फिर भी हमें समय नष्ट न करते हुए कौरवों को उचित उत्तर देना चाहिए।"
 
Satyaki said - Balarama! This is not the time to sit and lament. Now whatever is to be done, we all should do it together. Although Maharaj Yudhishthira does not say anything to us, still we should not waste time and give a proper answer to the Kauravas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)