Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.12.98: इस प्रकार पूछने पर वह अतुलनीय सुन्दरी राक्षस कन्या, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकती थी, महात्मा भीम से बोली - ॥98॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  3.12.98 
एवमुक्ता तु भीमेन राक्षसी कामरूपिणी।
भीमसेनं महात्मानमाह चैवमनिन्दिता॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार पूछने पर वह अतुलनीय सुन्दरी राक्षस कन्या, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकती थी, महात्मा भीम से बोली - ॥98॥
 
On being asked thus, that incomparably beautiful demon girl, who could assume any form as per her wish, said to Mahatma Bhima - ॥98॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)