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mahabharat 3.12.97: उनका स्पर्श पाकर महाबली, सत्यवादी और अमर आत्मा भीमसेन जाग उठे और उन्होंने पूछा - 'सुन्दरी! तुम यहाँ क्या चाहती हो?' 97॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  3.12.97 
तामबुध्यदमेयात्मा बलवान् सत्यविक्रम:।
पर्यपृच्छत तां भीम: किमिहेच्छस्यनिन्दिते॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
उनका स्पर्श पाकर महाबली, सत्यवादी और अमर आत्मा भीमसेन जाग उठे और उन्होंने पूछा - 'सुन्दरी! तुम यहाँ क्या चाहती हो?' 97॥
 
On receiving his touch, Bhimsen, the mighty, truthful and immortal soul, woke up. On waking up he asked – 'Beautiful! What do you want here?' 97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)