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mahabharat 3.12.89-90: उस समय वायु के समान वेगवान और पराक्रमी महाबली भीमसेन ने आर्या कुन्ती तथा उसके भाइयों को आश्वस्त करते हुए कहा - 'जैसे पक्षियों में श्रेष्ठ विनतानन्दन गरुड़ उड़ते हैं, उसी प्रकार मैं तुम सबको लेकर यहाँ से चला जाऊँगा। अतः तुम्हें यहाँ किसी भी प्रकार का भय नहीं है।'॥ 89-90॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 89-90
 
 
श्लोक  3.12.89-90 
तत्र भीमो महाबाहुर्वायुवेगपराक्रम:।
आर्यामाश्वासयामास भ्रातॄंश्चापि वृकोदर:॥ ८९॥
वैनतेयो यथा पक्षी गरुत्मान् पततां वर:।
तथैवाभिपतिष्यामि भयं वो नेह विद्यते॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
उस समय वायु के समान वेगवान और पराक्रमी महाबली भीमसेन ने आर्या कुन्ती तथा उसके भाइयों को आश्वस्त करते हुए कहा - 'जैसे पक्षियों में श्रेष्ठ विनतानन्दन गरुड़ उड़ते हैं, उसी प्रकार मैं तुम सबको लेकर यहाँ से चला जाऊँगा। अतः तुम्हें यहाँ किसी भी प्रकार का भय नहीं है।'॥ 89-90॥
 
At that time, the powerful Bhimasena, who was as swift and powerful as the wind, assured Arya Kunti and his brothers and said, 'Just as Vinatanandan Garuda, the best among birds, flies, in the same manner I will take you all and go from here. Therefore, you need not fear here at all.'॥ 89-90॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)