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mahabharat 3.12.83: जब उनकी आंखें खुलीं, तब महाबली भीमसेन ने सारे बंधन तोड़ डाले और जल से ऊपर उठ गए।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  3.12.83 
यदा विबुद्ध: कौन्तेयस्तदा संच्छिद्य बन्धनम्।
उदतिष्ठन्महाबाहुर्भीमसेनो महाबल:॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
जब उनकी आंखें खुलीं, तब महाबली भीमसेन ने सारे बंधन तोड़ डाले और जल से ऊपर उठ गए।
 
When his eyes opened, the mighty, powerful Bhimasena broke all the bonds and rose above the water. 83.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)