Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.12.8-9: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भगवान श्रीकृष्ण कुन्तीपुत्रों के अपमान से इतने क्रोधित हो गये कि उन्हें ऐसा लगा मानो वे समस्त प्रजा को जलाकर भस्म कर देंगे। उन्हें इतना क्रोधित देखकर अर्जुन ने उन्हें शांत किया और उन महात्मा सत्यकीर्ति के पूर्वजन्मों में किये हुए कर्मों का वर्णन करने लगे। | mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भगवान श्रीकृष्ण कुन्तीपुत्रों के अपमान से इतने क्रोधित हो गये कि उन्हें ऐसा लगा मानो वे समस्त प्रजा को जलाकर भस्म कर देंगे। उन्हें इतना क्रोधित देखकर अर्जुन ने उन्हें शांत किया और उन महात्मा सत्यकीर्ति के पूर्वजन्मों में किये हुए कर्मों का वर्णन करने लगे।
Vaishampayana says - Janamejaya! Lord Krishna became so angry at the insult of Kunti's sons that he felt as if he would burn the entire population to ashes. Seeing him so angry, Arjuna pacified him and started reciting the deeds done by that great soul of Satyakirti in his previous bodies. 8-9.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥