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mahabharat 3.12.66: मैं तो केवल उन पराक्रमी पाण्डवों की निन्दा करता हूँ, जो युद्ध में श्रेष्ठ थे और अपनी यशस्वी पत्नी को शत्रुओं द्वारा कष्ट पाते हुए देख रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  3.12.66 
गर्हये पाण्डवांस्त्वेव युधि श्रेष्ठान् महाबलान्।
यत्क्लिश्यमानां प्रेक्षन्ते धर्मपत्नीं यशस्विनीम्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
मैं तो केवल उन पराक्रमी पाण्डवों की निन्दा करता हूँ, जो युद्ध में श्रेष्ठ थे और अपनी यशस्वी पत्नी को शत्रुओं द्वारा कष्ट पाते हुए देख रहे थे।
 
I only denounce the mighty Pandavas, best in battle, who were watching their glorious wife being tormented by the enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)