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mahabharat 3.12.26: हे परंतप श्रीकृष्ण! वामन अवतार के समय आपने नन्हें बालक होते हुए भी अपने तेज से तीन पगों में स्वर्ग, अंतरिक्ष और पृथ्वी को नाप लिया था।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.12.26 
शिशुर्भूत्वा दिवं खं च पृथिवीं च परंतप।
त्रिभिर्विक्रमणै: कृष्ण क्रान्तवानसि तेजसा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे परंतप श्रीकृष्ण! वामन अवतार के समय आपने नन्हें बालक होते हुए भी अपने तेज से तीन पगों में स्वर्ग, अंतरिक्ष और पृथ्वी को नाप लिया था।
 
O Parantapa Sri Krishna! At the time of the Vamana incarnation, even though you were a small child, with your brilliance you measured the heaven, the space and the earth with three steps.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)