Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.12.18: भूमिपुत्र आपने ही नरकासुर को मारकर अदिति के दो अनमोल कुण्डल लाये थे; तथा आपने ही सृष्टि के आदि में उत्पन्न हुए यज्ञ के योग्य घोड़े को भी उत्पन्न किया था॥18॥ | mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निहत्य नरकं भौममाहृत्य मणिकुण्डले।
प्रथमोत्पतितं कृष्ण मेध्यमश्वमवासृज:॥ १८॥
अनुवाद
भूमिपुत्र आपने ही नरकासुर को मारकर अदिति के दो अनमोल कुण्डल लाये थे; तथा आपने ही सृष्टि के आदि में उत्पन्न हुए यज्ञ के योग्य घोड़े को भी उत्पन्न किया था॥18॥
You, the son of Bhumi, had killed Narakasura and brought Aditi's two precious earrings; And it was you who created the horse suitable for the Yagya that was born at the beginning of the universe. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥