Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.12.15-16: गोविन्द! आप पुण्यात्मा पुरुषों के लिए बने प्रभास तीर्थ में गए और लोगों को तप की प्रेरणा देने के लिए आप शौच, संतोष आदि नियमों में स्थित रहे और अत्यंत तेजस्वी रूप धारण करके एक हजार दिव्य वर्षों तक एक पैर पर खड़े रहे। ये सब बातें श्री व्यासजी ने मुझसे कही हैं॥ 15-16॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  3.12.15-16 
प्रभासमप्यथासाद्य तीर्थं पुण्यजनोचितम्।
तथा कृष्ण महातेजा दिव्यं वर्षसहस्रकम्॥ १५॥
अतिष्ठस्त्वमथैकेन पादेन नियमस्थित:।
लोकप्रवृत्तिहेतुस्त्वमिति व्यासो ममाब्रवीत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
गोविन्द! आप पुण्यात्मा पुरुषों के लिए बने प्रभास तीर्थ में गए और लोगों को तप की प्रेरणा देने के लिए आप शौच, संतोष आदि नियमों में स्थित रहे और अत्यंत तेजस्वी रूप धारण करके एक हजार दिव्य वर्षों तक एक पैर पर खड़े रहे। ये सब बातें श्री व्यासजी ने मुझसे कही हैं॥ 15-16॥
 
Govind! You went to Prabhas Tirtha, which is meant for pious men, and in order to inspire people to do penance, you remained established in the rules of cleanliness, satisfaction etc. and stood on one leg for a thousand divine years in a very radiant form. All these things have been told to me by Shri Vyasji.॥ 15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)