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mahabharat 3.12.130-132: मैं सच्चे मन से कह रही हूँ कि तुम ही रानी बनोगी। कृष्ण! आकाश फट जाए, हिमालय फट जाए, पृथ्वी टुकड़े-टुकड़े हो जाए और समुद्र सूख जाए, परन्तु मेरी बात झूठी नहीं हो सकती। भगवान श्रीकृष्ण के ऐसे वचन सुनकर द्रौपदी ने अपने मझले पति अर्जुन की ओर तिरछी दृष्टि से देखा। महाराज! तब अर्जुन ने द्रौपदी से कहा -॥130-132॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 130-132
 
 
श्लोक  3.12.130-132 
सत्यं ते प्रतिजानामि राज्ञां राज्ञी भविष्यसि।
पतेद् द्यौर्हिमवाञ्छीर्येत् पृथिवी शकलीभवेत्॥ १३०॥
शुष्येत् तोयनिधि: कृष्णे न मे मोघं वचो भवेत्।
तच्छ्रुत्वा द्रौपदी वाक्यं प्रतिवाक्यमथाच्युतात्॥ १३१॥
साचीकृतमवेक्षत् सा पाञ्चाली मध्यमं पतिम्।
आबभाषे महाराज द्रौपदीमर्जुनस्तदा॥ १३२॥
 
 
अनुवाद
मैं सच्चे मन से कह रही हूँ कि तुम ही रानी बनोगी। कृष्ण! आकाश फट जाए, हिमालय फट जाए, पृथ्वी टुकड़े-टुकड़े हो जाए और समुद्र सूख जाए, परन्तु मेरी बात झूठी नहीं हो सकती। भगवान श्रीकृष्ण के ऐसे वचन सुनकर द्रौपदी ने अपने मझले पति अर्जुन की ओर तिरछी दृष्टि से देखा। महाराज! तब अर्जुन ने द्रौपदी से कहा -॥130-132॥
 
I am saying it with all sincerity that you will become the queen. Krishna! The sky may burst, the Himalayas may be torn apart, the earth may be broken into pieces and the sea may dry up, but my words cannot be false. Hearing such words from Lord Krishna in reply to her words, Draupadi looked at her middle husband Arjun with a side glance. Maharaj! Then Arjun said to Draupadi -॥130-132॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)