Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.12.127: ‘श्रीकृष्ण! आपको चार कारणों से सदैव मेरी रक्षा करनी चाहिए । प्रथम, आप मेरे स्वजन हैं, द्वितीय, अग्निकुण्ड में जन्म लेने के कारण मैं गौरवान्वित हूँ, तृतीय, मैं आपका सच्चा मित्र हूँ और चतुर्थ, आप मेरी रक्षा करने में समर्थ हैं ।’॥127॥ | mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘श्रीकृष्ण! आपको चार कारणों से सदैव मेरी रक्षा करनी चाहिए । प्रथम, आप मेरे स्वजन हैं, द्वितीय, अग्निकुण्ड में जन्म लेने के कारण मैं गौरवान्वित हूँ, तृतीय, मैं आपका सच्चा मित्र हूँ और चतुर्थ, आप मेरी रक्षा करने में समर्थ हैं ।’॥127॥
‘Sri Krishna! You should always protect me for four reasons. Firstly, you are my relative, secondly, I am proud because I was born in a fire pit, thirdly, I am your true friend and fourthly, you are capable of protecting me.’॥127॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥