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mahabharat 3.12.125: मधुसूदन! मेरे लिए न तो कोई पति है, न कोई पुत्र, न कोई बंधु, न कोई भाई, न कोई पिता और न ही आप ही हैं॥125॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  3.12.125 
नैव मे पतय: सन्ति न पुत्रा न च बान्धवा:।
न भ्रातरो न च पिता नैव त्वं मधुसूदन॥ १२५॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! मेरे लिए न तो कोई पति है, न कोई पुत्र, न कोई बंधु, न कोई भाई, न कोई पिता और न ही आप ही हैं॥125॥
 
'Madhusudana! For me there is neither a husband, nor a son, nor a relative, nor a brother, nor a father, nor even you.॥ 125॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)