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mahabharat 3.12.123: पांचाल की राजकुमारी कृष्णा अपने दृढ़, प्रमुख, शुभ और सुंदर स्तनों से शोक के आंसू बहाने लगी ॥123॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  3.12.123 
स्तनावपतितौ पीनौ सुजातौ शुभलक्षणौ।
अभ्यवर्षत पाञ्चाली दु:खजैरश्रुबिन्दुभि:॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
पांचाल की राजकुमारी कृष्णा अपने दृढ़, प्रमुख, शुभ और सुंदर स्तनों से शोक के आंसू बहाने लगी ॥123॥
 
The princess of Panchala, Krishna, began to shower tears of sorrow on her firm, prominent, auspicious and beautiful breasts. ॥123॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)