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mahabharat 3.12.120: यह सर्वविदित है कि ईश्वरीय कृपा से मेरा जन्म एक महान कुल में हुआ है। मैं पांडवों की प्रिय पत्नी और महाराज पांडु की पुत्रवधू हूँ।   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  3.12.120 
कुले महति जातास्मि दिव्येन विधिना किल।
पाण्डवानां प्रिया भार्या स्नुषा पाण्डोर्महात्मन:॥ १२०॥
 
 
अनुवाद
यह सर्वविदित है कि ईश्वरीय कृपा से मेरा जन्म एक महान कुल में हुआ है। मैं पांडवों की प्रिय पत्नी और महाराज पांडु की पुत्रवधू हूँ।
 
It is well known that I was born in a great family by divine providence. I am the beloved wife of the Pandavas and daughter-in-law of Maharaja Pandu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)