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mahabharat 3.12.109: हे निष्पाप श्रीकृष्ण! महाबली भीमसेन ने उस राक्षस के साथ बहुत समय तक क्रीड़ा की और फिर जब वह दुर्बल हो गया, तब उसे मार डाला॥109॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  3.12.109 
विक्रीडॺ सुचिरं भीमो राक्षसेन सहानघ।
निजघान महावीर्यस्तं तदा निर्बलं बली॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप श्रीकृष्ण! महाबली भीमसेन ने उस राक्षस के साथ बहुत समय तक क्रीड़ा की और फिर जब वह दुर्बल हो गया, तब उसे मार डाला॥109॥
 
Sinless Shri Krishna! The mighty and powerful Bhimasena played with the demon for a long time and then killed him when he became weak.॥ 109॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)