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mahabharat 3.12.100: यह सुनकर भीम ने गर्व से कहा - 'मैं उस राक्षस से नहीं डरता। यदि वह यहाँ आएगा, तो मैं उसे मार डालूँगा।'॥100॥   |   mahabharat अध्याय 3.12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 12: अर्जुन और द्रौपदीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति, द्रौपदीका भगवान् श्रीकृष्णसे अपने प्रति किये गये अपमान और दु:खका वर्णन और भगवान् श्रीकृष्ण, अर्जुन एवं धृष्टद्युम्नका उसे आश्वासन देना  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  3.12.100 
अथ भीमोऽभ्युवाचैनां साभिमानमिदं वच:।
नोद्विजेयमहं तस्मान्निहनिष्येऽहमागतम्॥ १००॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर भीम ने गर्व से कहा - 'मैं उस राक्षस से नहीं डरता। यदि वह यहाँ आएगा, तो मैं उसे मार डालूँगा।'॥100॥
 
Hearing this, Bhima said proudly - 'I am not afraid of that demon. If he comes here, I will kill him.'॥ 100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)