श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 118: युधिष्ठिरका विभिन्न तीर्थोंमें होते हुए प्रभासक्षेत्रमें पहुँचकर तपस्यामें प्रवृत्त होना और यादवोंका पाण्डवोंसे मिलना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.118.18 
तमुग्रमास्थाय तपश्चरन्तं
शुश्राव रामश्च जनार्दनश्च।
तौ सर्ववृष्णिप्रवरौ ससैन्यौ
युधिष्ठिरं जग्मतुराजमीढम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इसी समय वृष्णिवंश के प्रधान भगवान श्रीकृष्ण और बलरामजी ने सुना कि राजा युधिष्ठिर प्रभास क्षेत्र में घोर तपस्या कर रहे हैं; तब वे अपने सैनिकों के साथ अजमीढ़वंश के रत्न युधिष्ठिर से मिलने गए॥18॥
 
At this time, Lord Krishna and Balarama, the head of the Vrishni clan, heard that King Yudhishthira was performing severe penance in Prabhas Kshetra; then they, along with their soldiers, went to meet Yudhishthira, the jewel of the Ajamidha clan.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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