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श्लोक 3.117.9  |
त्रि:सप्तकृत्व: पृथिवीं कृत्वा नि:क्षत्रियां प्रभु:।
समन्तपञ्चके पञ्च चकार रुधिरह्रदान्॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार भगवान परशुराम ने इस पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रियों से शून्य कर दिया और उनके रक्त से समन्तपंचक क्षेत्र में पाँच रक्त कुण्ड भर दिए ॥9॥ |
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| In this way, Lord Parashurama emptied this earth of Kshatriyas twenty-one times and filled five blood pools in the Samantapanchak area with their blood. 9॥ |
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