श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 117: परशुरामजीका पिताके लिये विलाप और पृथ्वीको इक्‍कीस बार नि:क्षत्रिय करना एवं महाराज युधिष्ठिरके द्वारा परशुरामजीका पूजन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.117.9 
त्रि:सप्तकृत्व: पृथिवीं कृत्वा नि:क्षत्रियां प्रभु:।
समन्तपञ्चके पञ्च चकार रुधिरह्रदान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान परशुराम ने इस पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रियों से शून्य कर दिया और उनके रक्त से समन्तपंचक क्षेत्र में पाँच रक्त कुण्ड भर दिए ॥9॥
 
In this way, Lord Parashurama emptied this earth of Kshatriyas twenty-one times and filled five blood pools in the Samantapanchak area with their blood. 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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