श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 117: परशुरामजीका पिताके लिये विलाप और पृथ्वीको इक्‍कीस बार नि:क्षत्रिय करना एवं महाराज युधिष्ठिरके द्वारा परशुरामजीका पूजन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.117.7 
संक्रुद्धोऽतिबल: संख्ये शस्त्रमादाय वीर्यवान्।
जघ्निवान् कार्तवीर्यस्य सुतानेकोऽन्तकोपम:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अत्यन्त बलवान और पराक्रमी परशुरामजी क्रोध में आकर साक्षात् यमराज के समान हो गए और युद्ध में शस्त्र लेकर अकेले ही कार्तवीर्य के समस्त पुत्रों को मार डाला॥7॥
 
The extremely strong and valiant Parshuramji became like Yamraj in person in a fit of anger. Taking weapons in battle, he single-handedly killed all the sons of Kartavirya. 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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