श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 117: परशुरामजीका पिताके लिये विलाप और पृथ्वीको इक्‍कीस बार नि:क्षत्रिय करना एवं महाराज युधिष्ठिरके द्वारा परशुरामजीका पूजन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.117.4 
किं नु ते तत्र वक्ष्यन्ति सचिवेषु सुहृत्सु च।
अयुध्यमानं धर्मज्ञमेकं हत्वानपत्रपा:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वे निर्लज्ज राजकुमार आप जैसे असहाय और युद्ध से विरत रहने वाले ज्ञानी पुरुष को मारकर अपने मित्रों और मंत्रियों से क्या कहेंगे? ॥4॥
 
What will those shameless princes say to their friends and ministers after killing a helpless and knowledgeable person like you who stays away from war? ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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