श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 117: परशुरामजीका पिताके लिये विलाप और पृथ्वीको इक्‍कीस बार नि:क्षत्रिय करना एवं महाराज युधिष्ठिरके द्वारा परशुरामजीका पूजन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.117.17 
स तमानर्च राजेन्द्र भ्रातृभि: सहित: प्रभु:।
द्विजानां च परां पूजां चक्रे नृपतिसत्तम:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजन्! उस समय पराक्रमी राजा युधिष्ठिर ने अपने भाइयों के साथ बड़ी भक्तिपूर्वक भगवान परशुराम की पूजा की तथा अन्य ब्राह्मणों का भी बड़ा आदर किया।
 
King! At that time the mighty king Yudhishthira, along with his brothers, worshipped Lord Parashurama with great devotion and also treated other Brahmins with great respect.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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