श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 117: परशुरामजीका पिताके लिये विलाप और पृथ्वीको इक्‍कीस बार नि:क्षत्रिय करना एवं महाराज युधिष्ठिरके द्वारा परशुरामजीका पूजन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.117.13 
तां कश्यपस्यानुमते ब्राह्मणा: खण्डशस्तदा।
व्यभजंस्ते तदा राजन् प्रख्याता: खाण्डवायना:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजन! उस समय कश्यप की आज्ञा से ब्राह्मणों ने उस स्वर्णमयी वेदी को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और इस प्रकार वह खाण्डवायन नाम से प्रसिद्ध हुई।
 
King! At that time, by Kasyapa's order, the Brahmins divided that golden altar into pieces and thus it became famous by the name of Khandavayan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)