श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 117: परशुरामजीका पिताके लिये विलाप और पृथ्वीको इक्‍कीस बार नि:क्षत्रिय करना एवं महाराज युधिष्ठिरके द्वारा परशुरामजीका पूजन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.117.10 
स तेषु तर्पयामास भृगून् भृगुकुलोद्वह:।
साक्षाद् ददर्श चर्चीकं स च रामं न्यवारयत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भृगुकुलभूषण राम ने उन तालाबों में भृगुवंशी पितरों का तर्पण किया और उसी समय उन्होंने महर्षि ऋचीक को साक्षात् प्रकट होते देखा, और परशुराम को इस घोर कृत्य से रोका ॥10॥
 
Bhrigukulbhushan Ram offered the offerings to the Bhriguvanshi ancestors in those ponds and at that time he saw Maharishi Richik appearing in person. He stopped Parashuram from this terrible act. 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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