श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 117: परशुरामजीका पिताके लिये विलाप और पृथ्वीको इक्‍कीस बार नि:क्षत्रिय करना एवं महाराज युधिष्ठिरके द्वारा परशुरामजीका पूजन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.117.1 
राम उवाच
ममापराधात् तै: क्षुद्रैर्हतस्त्वं तात बालिशै:।
कार्तवीर्यस्य दायादैर्वने मृग इवेषुभि:॥ १॥
 
 
अनुवाद
परशुराम बोले, 'हे प्रिये! मेरे अपराध का बदला लेने के लिए कार्तवीर्य के उन दुष्ट एवं दुष्ट पुत्रों ने तुम्हें उसी प्रकार मार डाला है, जैसे वन में बाणों से मारे गए हिरण।'
 
Parasurama said, 'Oh my dear! To avenge my crime, those wicked and evil sons of Kartavirya have killed you like a deer killed by arrows in the forest.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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