Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.116.20-21: आश्रम पहुँचने पर, ऋषि की पत्नी रेणुका ने उनका यथोचित आतिथ्य सत्कार किया। कार्तवीर्य अर्जुन युद्ध-शक्ति के नशे में चूर था। उसने आतिथ्य को आदरपूर्वक स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय, उसने आश्रम के आश्रम को तहस-नहस कर दिया और वहाँ रो रहे गाय के बछड़े को बलपूर्वक ले गया तथा आश्रम के बड़े-बड़े वृक्षों को भी तोड़ डाला। | mahabharat अध्याय 3.116: पिताकी आज्ञासे परशुरामजीका अपनी माताका मस्तक काटना और उन्हींके वरदानसे पुन: जिलाना, परशुरामजीद्वारा कार्तवीर्य-अर्जुनका वध और उसके पुत्रोंद्वारा जमदग्नि मुनिकी हत्या । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमाश्रमपदं प्राप्तमृषेर्भार्या समार्चयत्।
स युद्धमदसम्मत्तो नाभ्यनन्दत् तथार्चनम्॥ २०॥
प्रमथ्य चाश्रमात् तस्माद्धोमधेनोस्तथा बलात्।
जहार वत्सं क्रोशन्त्या बभञ्ज च महाद्रुमान्॥ २१॥
अनुवाद
आश्रम पहुँचने पर, ऋषि की पत्नी रेणुका ने उनका यथोचित आतिथ्य सत्कार किया। कार्तवीर्य अर्जुन युद्ध-शक्ति के नशे में चूर था। उसने आतिथ्य को आदरपूर्वक स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय, उसने आश्रम के आश्रम को तहस-नहस कर दिया और वहाँ रो रहे गाय के बछड़े को बलपूर्वक ले गया तथा आश्रम के बड़े-बड़े वृक्षों को भी तोड़ डाला।
On his arrival at the hermitage, the sage's wife Renuka welcomed him with due hospitality. Kartavirya Arjuna was intoxicated with the power of war. He did not accept the hospitality with respect. Instead, he devastated the hermitage's hermitage and forcibly took away the calf of the cow that was crying from there and also broke the big trees of the hermitage.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥