श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 115: अकृतव्रणके द्वारा युधिष्ठिरसे परशुरामजीके उपाख्यानके प्रसंगमें ऋचीक मुनिका गाधिकन्याके साथ विवाह और भृगुऋषिकी कृपासे जमदग्निकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.115.8 
स भवान् कथयत्वद्य यथा रामेण निर्जिता:।
आहवे क्षत्रिया: सर्वे कथं केन च हेतुना॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अतः हम आपसे यह जानना चाहते हैं कि परशुराम ने युद्ध में समस्त क्षत्रियों को कैसे और क्यों परास्त किया। कृपया आज मुझे सम्पूर्ण वृत्तांत सुनाएँ॥8॥
 
Therefore, we want to know from you how and why Parashurama defeated all the Kshatriyas in the war. Please tell me the whole story today. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)